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Showing posts from March, 2018

आरक्षण एक बीमारी

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आरक्षण के बारे मै हम सब ने  अच्छी तरह सुना ह और आज हम सब यह जानते  ह की आज आरक्षण क कारण क्या क्या हो रहा ह परन्तु क्या आरक्षण क बारे मे सरकार को पता नहीं ह या  सरकार जानबूझकर अनजान बनी हुई ह वैसे आरक्षण की शुरुवात 1892 से हुई थी परन्तु धीरे धीरे बढ़ता हुआ 1947 मे डॉ भीम राव जी नै 10 सालो क लिए लागु किया था परन्तु ऐसा नहीं था की वो 10 सालो हटाया नहीं जा सकता ह | डॉ  जी नै लोगो क हितो को ध्यान मे रखकर  यह लागु किया था परन्तु उनको भी नहीं पता था की आने वाले सालो मे सरकारे इसका राजनीती का मुद्दा बना लेगी और यह देश हित मे काम नहीं आएगा | जैसी जैसी राजनीती पार्टिया बड़ी होती गई वो इस मुद्द्य को बड़ा बना थी गई और अपना स्वार्थ को लेकर इस समस्या का कभी समाधान नहीं किया |   यदि कोई भी सरकार चाहती तो यह कर सकती थी परन्तु सरकार यह करती थो चुनावी मुदा का क्या बनाती |  परन्तु यह आरक्षण  की बीमारी आज बहुत बड़ी हो चुकी ह परन्तु अभी भी लाइलाज नहीं ह आज ऐसी कोई जगह नहीं होगी भारत मे जहा आरक्षण को लेकर वादविवाद नहीं हो एक्चुली मे कुछ जगह सही ह परन्तु...

मेहनत की तस्वीर

बात आज से लगभग ५० -६० साल पुरानी ह जब एक नारी शक्ति का जन्म हुआ बात सन १९६१ की ह जब महाराष्ट्र क एक छोटे गांव रोपरखेड़ा मे एक दलित परिवार म  एक साधारण लड़की का जन्म हुआ जिसका नाम कल्पना  सरोज था लड़की की पिता पुलिस हवलदार थे और उनकी ३०० रुपए  की कमाई से उनका सयुक्त परिवार का भरण पोषण होता था कल्पना सरोज पढ़ाई मे होशियार थी उहोंने अपनी पढाई  सरकारी स्कूल से की और गांव मे बिजली भी नहीं थी १२ साल की उम्र मे घर वालो ने कल्पना जी की शादी समाज क दबाव मे  आकर कर दी उस टाइम सामाजिक  सोसायटियां अलग तरीके  हुआ करती थी शादी क बाद कल्पना जी मुंबई आ गई पर ससुराल  मे उनको यातनाओ क अलावा कुछ नहीं मिला ससुराल की यातनाओ को देख्कर कल्पना जी क पिता जी कल्पना जी को वापस अपने घर ले आए | शादी सुधा लड़किया  यदि मायके मे रहती ह तो समाज  उनको ताने देने लग जाता | इन सब समाज क  तानो से परेसान होकर कल्पना जी ने आत्महत्या का प्रयास किया परन्तु ऊपर वाले को और ही मंजूर था | और वो इस प्रयास मे फ़ैल हो गई पर उनकी लाइफ ने वही से नया मोड ले लिया उहोंने अप...

धर्म की राजनीती

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राजनीती यह शब्द बहुत ही बड़ा ह हर जगह अपना महत्व रखता ह आज आप जहा भी देखोगे वहा ही आपको राजनीती आपको नजर आएगी | गांव की परम्परागत राजनीती से लेकर अंतरराट्रीय स्तर तक राजनीती अपना महत्त्व रक्ती ह आज के टाइम  मे हर जगह राजनीती का पाठ ह राजनीती करते करते आज देश मे  बहुत बड़े बड़े दल भी बन गए ह और हर एक दल अपना अलग मुद्दा रक्ता ह सोल्युशन किसी क पास नहीं होता ह पर छोटी छोटी चीज़ो को बड़े स्तर पर राजनीती का मुद्दा बना देते ह थोड़े दिनों मे लोगो को जोड़ कर राजनीती का दल बना लेते ह और सब अपने स्वार्थ सिद्ध करते रहते ह देश मे सबसे बड़ा मुद्दा धर्म  का ह यानि धर्म की राजनीती | आज  बहुत सारे राजनीती दल इस मुद्दे बहुत सालो से राजनीती करते  आ रहे ह पर आज तक इस समस्या का सॉलूशन नहीं हुआ हर दिन लोग केवल धर्म पर लड़ते ह ऐसा क्यों ,क्योंकि राजनीती वाले लोग ही अपना स्वार्थ पूरा करने क लिए लोगो को बहकाते ह कुछ लोग बिना की चीज़ो का गौर किये लोगो की भीड़ मे शामिल हो जाते ह भीड़ को समझाना तो दूर वो भी उनके साथ पागलो की तरह कूद पड़ते ह और मुद्दों को बड़ा बनाकर धार्मिक भावनाओ क साथ खेलते रहते ह ज...

हैप्पी होली

रंगो से भरी हुई  हैप्पी होली देकते ही देकते दिन बीते जा रहे ह कल्चर चेंज  होता जा रहा ह बचपन मे लगता था की कोई त्यौहार आने वाला ह पर आजकल तो लाइफ इतनी बिजी हो गई ह की ना त्यौहार का पता लगता ह और ना लाइफ का पुराने जमाने मे लोग मिलजुल कर त्यौहार पर एक साथ एक ग्रुप मे  एन्जॉय करते थे वो आज कल्चर ऐसा हो गया ह फैमली क लिए भी टाइम नहीं ह | त्योहारों का देश भारत बहुत पुराने समय से त्यौहार मनाता आ रहा ह हर एक त्यौहार क पीछे कोई ना कोई धार्मिक भावना का जुड़ाव ह | आजकल क कल्चर मे या तो धार्मिक भावनाए कम हो गई ह या लोग अपना पेट पालने मे  इतना बिजी हो गे की सब भूल गए ह त्योहारों का महत्व दिनों दिन कम होता जा रहा ह सवाल अब यह ह की क्या आने वाले टाइम मे त्यौहारो का लोग महत्व समजंगे की नहीं | हर एक त्यौहार अपना एक सन्देश देता ह | होली का त्यौहार जो हम मनाने जा रहे  यह सत्य पर विजय क लिए तो दूसरी और यह त्यौहार बसंत ऋतू क स्वागत क लिए मनाया जाता ह | जैसे जैसे टाइम बिता जा रहा लोगो हिंदी त्योहारों का महत्व भूलते जा रहे ह आधे लोगो को आज हिंदी महिने का दिन भी याद नहीं होगा ...