मेहनत की तस्वीर

बात आज से लगभग ५० -६० साल पुरानी ह जब एक नारी शक्ति का जन्म हुआ बात सन १९६१ की ह जब महाराष्ट्र क एक छोटे गांव रोपरखेड़ा मे एक दलित परिवार म  एक साधारण लड़की का जन्म हुआ जिसका नाम कल्पना  सरोज था लड़की की पिता पुलिस हवलदार थे और उनकी ३०० रुपए  की कमाई से उनका सयुक्त परिवार का भरण पोषण होता था कल्पना सरोज पढ़ाई मे होशियार थी उहोंने अपनी पढाई  सरकारी स्कूल से की और गांव मे बिजली भी नहीं थी १२ साल की उम्र मे घर वालो ने कल्पना जी की शादी समाज क दबाव मे  आकर कर दी उस टाइम सामाजिक  सोसायटियां अलग तरीके  हुआ करती थी शादी क बाद कल्पना जी मुंबई आ गई
पर ससुराल  मे उनको यातनाओ क अलावा कुछ नहीं मिला ससुराल की यातनाओ को देख्कर कल्पना जी क पिता जी कल्पना जी को वापस अपने घर ले आए | शादी सुधा लड़किया  यदि मायके मे रहती ह तो समाज  उनको ताने देने लग जाता | इन सब समाज क  तानो से परेसान होकर कल्पना जी ने आत्महत्या का प्रयास किया परन्तु ऊपर वाले को और ही मंजूर था | और वो इस प्रयास मे फ़ैल हो गई पर उनकी लाइफ ने वही से नया मोड ले लिया उहोंने अपनी सोच बदली और सब कुछ ही बदल कर रख दिया और १६ साल की उम्र मे मुंबई मे चाचा क घर आ गई और सिलाई का काम स्टार्ट किया वो लगातार १६-१६घंटे सिलाई का काम किया करती थी  पर जो सिलाई क पैसे थे वो काफी नहीं थे तो उन्होंने २२ साल की उम्र मे महाराष्ट्र सरकार की योजना के अंतर्गत ५० हजार का लोन लिया और एक फर्नीचर का बिज़नेस चालू किया उसमे उनको अच्छी सफलता भी मिली | और इसी बिच उन्होंने एक ब्यूटीपार्लर भी ओपन किया | इसी बिच किसी प्लॉट क विवाद मे इनकी खिलाफ हत्या की साजिश भी हुई | इस साजिश मे मौत को करीब से देखा और इस मौत क डर को इतना पास से देकने क बाद इनका अंदर से मरने का डर ही ख़त्म हो गया उसके बाद वो एक लाइसेंस गन भी रकने लगी | और इसी प्लाट से उन्होने ४. ५ करोड़ की कमाई की |

इसी बिच एक कंपनी कमानी tubes  बंद होने की कगार पर थी उस कंपनी के कुछ लोग कल्पना जी क पास गए उन्होने सुन रखा था की कल्पना जी जिस मिट्टी को हाथ लगा दे वो सोना बन जाती ह | कल्पना जी ने जब यह प्रोजेक्ट देखा तो कम्पनी १०० करोड़ क ऊपर कर्ज मे थी और बहुत सारे मुकदमे चल रहे थे | उन्होने एक बार तो मना किया परन्तु जब उनको पता चला की बहुत लोगो का घर बार इसी
 से चल रहा ह और बहुत सारे कामवाले भूखा मर रहे ह तो उन्होने उन लोगो का सोच कर प्रोजेक्ट अपने हाथ मे ले लिया |
बोर्ड मे आते ही उन्होंने एक टीम तैयार की और सब रिपोर्ट तैयार की और इसी बिच  वित् मन्त्री से बैंक लोन को लेकर बैठक की | कल्पना जी ने बताया की कम्पनी पर बहुत सारा कर्ज केवल ब्याज और पेनल्टी का यदि वो उसको माफ़ करवा दे बाकि का मूलधन हम मांगने वालो को लौटा देंगे और ऐसा नहीं हुआ तो कम्पनी बंद हो जाएगी और किसी को कुछ नहीं मिलैगा और बहुत लोग बेरोजगार हो जायँगे | बैंको कल्पना जी बात समझ मे आ गई और बैंको ने कम्पनी पर ब्याज क अलावा मूलधन भी २५ % तक कम कर दिया | कल्पना जी ने २००० से २००६ तक कम्पनी मे संघर्ष किया २००६ मे कोर्ट ने कल्पना जी को कंपनी का मालिक बना दिया | और धीरे धीरे सब लोन चुकाने क बाद आज कंपनी ५०० करोड़ से भी ज्यादा की  हो गई ह

उनकी इस महान उपलब्धि क लिए 2013 मे उनको पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया और सरकार ने उनको भारतीय महिला बैंक क बोर्ड ऑफ़ डायेरक्टरस मे शामिल कर लिया |

कल्पना जी के  इस जीवन  से यह सन्देश मिलता ह कि आज हम अपनी सोच से और मेहनत से अपनी तस्वीर खुद बना सकते ह बडे  बड़े सपने पूरे कर सकथे ह केवल अपनी मजूबतियो पर ध्यान देकर और सोच बदलकर |
इस चीज़ से कोई असर नहीं पड़ता हम कितना गरीब और अमीर ह |




क्या मेरे देश मे बड़े बदलाव आयंगे। ........ ........
कमेंट करके बताइए ऐसे और कौन कौन से महान लोगो की कहानी दर्द भरी और उत्साहित करने वाली ह |







  ध्यान दे -सोर्स फ्रॉम गुगल।
किसान  का विकाश हम सब का विकाश - जय भारत जय किसान

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