बिटिया आई दौड़ी
रोज सुबह उठता में करता नित्य स्नान फिर भी ना दिल धुलता ना होता आत्म ज्ञान फिर भी रोज सुबह करता नित्य स्नान। पता नहीं क्यू आदत सी हो गई गालिया देते लोग महान ,बाते बड़ी बड़ी दर्शन छोटे छोटे फिर भी समजते महान। नाश्ता करके करि ऑफिस की तैयारी गाड़ी उठाई और पहुंच गए दफ्तर की यारी फिर मिले दोस्त पुराने और बन गए महान। काम धन्दे को पूरा किया हुई घर की तैयारी भागदौड़ से घर पहुंचे तब बिटिया आई दौड़ी ,
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