हूं एक जुगनू दीया नहीं हूं
हूं एक जुगनू दीया नहीं हूं,
मैं आंधियों से बुझा नहीं हूं!
गुरुर तोड़ा है उसका मैंने,
मैं मर गया हूं बिका नहीं हूं !!
मैं जाके मंजिल पर ही रुकूंगा,
मैं रास्ता हूं थका नहीं हूं !!
बुरा कहो और बुरा न मानूं,
मैं आदमी हूं खुदा नहीं हूं !!
अपनों से तो रूठा हूं मैं सौ बार बहरहाल,
गैरों में जाके मैं कभी बैठा तो नहीं हूं !!
मैं आंधियों से बुझा नहीं हूं!
गुरुर तोड़ा है उसका मैंने,
मैं मर गया हूं बिका नहीं हूं !!
मैं जाके मंजिल पर ही रुकूंगा,
मैं रास्ता हूं थका नहीं हूं !!
बुरा कहो और बुरा न मानूं,
मैं आदमी हूं खुदा नहीं हूं !!
अपनों से तो रूठा हूं मैं सौ बार बहरहाल,
गैरों में जाके मैं कभी बैठा तो नहीं हूं !!
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